अटल बिहारी वाजपेयी की आलोचना उनके विरोधी भी नहीं करते. 'अजातशत्रु', 'सर्वप्रिय' और 'सर्वमान्य' जैसे विशेषण उनके नाम के साथ लगाए जाते हैं.

वाजपेयी की सबसे बड़ी ख़ासियत थी व्यक्तिगत व्यवहार में उनकी सह्रदयता, विपरीत विचार वाले लोगों को निजी शत्रु मानकर न चलना और ग़ज़ब का वाक्चातुर्य लेकिन, ये मानना नासमझी ही होगी कि इसका कारण सिर्फ़ उनका मधुर व्यवहार है. उनकी छवि ऐसी बनी या बनाई गई कि लोग ये तक भूल गए कि वे आख़िरकार एक राजनीतिक नेता थे.
राजनीति में छवि से बढ़कर कुछ नहीं, इसी छवि को जनसत्ता के पूर्व संपादक और नामी पत्रकार प्रभाष जोशी "संघ का मुखौटा" लिखते थे. वाजपेयी आजीवन संघ के प्रचारक रहे, इतने लंबे राजनीतिक जीवन में वे लगातार संघ के नुमाइंदे की ही तरह काम करते रहे.
2001 में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए उन्होंने न्यूयॉर्क में कहा था, "आज प्रधानमंत्री हूँ, कल नहीं रहूँगा लेकिन संघ का स्वयंसेवक पहले भी था और आगे भी रहूँगा."

उनकी ये बात बिल्कुल सच्ची, सही और पक्की है. वाजपेयी संघ के समर्पित प्रचारक थे, उन्हें आरएसएस ने जनसंघ में काम करने के लिए भेजा था, वे मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री बने जबकि आडवाणी सूचना-प्रसारण मंत्री. 1977 में जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया था.
आगे चलकर समाजवादी धड़े के लोगों, ख़ास तौर से जॉर्ज फर्नांडिस ने ये मुद्दा उठाया कि दोहरी सदस्यता नहीं होनी चाहिए, यानी जो लोग जनता पार्टी में हैं वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य नहीं होने चाहिए, संघ के प्रति ये वाजपेयी-आडवाणी का समर्पण ही था कि उन्होंने सरकार छोड़ दी लेकिन संघ छोड़ने को राज़ी नहीं हुए.
इसी के बाद 1980 में जनसंघ नए रूप में सामने आया. पार्टी का नाम रखा गया भारतीय जनता पार्टी. बात मुख़्तसर ये है कि बीजेपी की पैदाइश से पहले से वाजपेयी-आडवाणी संघ के निर्देश पर ताल-मेल के साथ राजनीति करते रहे हैं और 2004 में इंडिया शाइनिंग वाला चुनाव हारने तक ये जोड़ी बनी रही और हिंदुत्व को पुख़्ता बनाने में जुटी रही.
ये बात अहम इसलिए है क्योंकि संघ वह संगठन है जिसका घोषित लक्ष्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है, हिंदू वर्चस्ववाद के मॉडल में जिसका विश्वास है, वो ऐसा संगठन है जो किसी के प्रति किसी तरह से उत्तरदायी नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक तरीक़े से चुना गया देश का प्रधानमंत्री अगर भाजपा से हो तो वह सरसंघचालक के आदेशों का पालन करता है.
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