सरकार बना रही है गरीबों को भिखारी बनाने का मास्टरप्लान चाहे वह केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार

हाँ मैं आपको बिल्कुल सही बता रहा हूँ, आप स्वयं इतिहास के पन्नों को पलटकर देखेंगे तो आपको निश्चित ही यह एहसास हो जाएगा। मैं आपको दावे के साथ कह सकता हूँ कि किसी भी व्यक्ति को सरकार बनाने के पीछे अगर व्यक्तिगत लाभ न हो तो वह कभी भी सरकार नहीं बनाएगा। बहुत से बहुत फकीर बन जायेगा या सामाजिक कार्य में लग जायेगा। लेकिक हम जनता मूर्ख ऐसे है जो इस बात को आजादी की इतने सालों बाद भी नहीं समझ पाए। सरकार जो कुछ भी कहती गयी हम विश्वास करते गए। करें भी तो क्या क्योंकि हम कभी नहीं सम्भले, क्यों नहीं सम्भले क्योंकि 2कौरी के लालच में उलझे रहे।
आपको लग रहा होगा कि मैं आपको मूल मुद्दा से भटका रहा हूँ, जी नहीं ऐसा बिल्कुल ही नहीं हैं।
पहला सबूत: गांव में गरीब लोग जलावन से अपना खाना आसानी से बना लेते थे, किन्तु सरकार की उसपर नजर पड़ी सोच अरे यहां से तो साला कोई कर ही नहीं आ रहा हैं। एक काम करो पहले सब को मुफ्त में एलपीजी बाटों फिर ये जैसे ही इसके आदि हो जाएंगे तो कर आना सुरु हो जाएगा। ध्यान रहे सरकार जो चोरी करके ऐयासी करेगी इसके लिए कर का अधिकतम मात्रा में आना जरूरी है तभी तो सरकारी कार्य के नामपर प्रतिशत कमीशन बांधा जाएगा। बस एक ही उदाहरण दूंगा
एक और उदाहरण लीजिये हर घर नल की इसमे तो सरकार को कर जाएगा परन्तु चापाकल से नही जाता , और जाता भी तो नल से कम।
अब बात करते है कि हमे भिखारी कैसे बना रही है।
देखिए हम कर देते है और उसीमेसे हमे वो सब्सिडी और अनुदान देता हैं।चूंकि 100 लेता है तो एक देता है, हम चाहते है न लेना न देना। सरकार चलाने है तो समाजसेवी बनकर चलाओ शासक बनकर नही।
जिस दिन हम सभी पार्टियों को सत्ता से बेदखल कर देंगे और गरीब लोगों को सरकार में बैठा देंगे उसी दिन यह सारा परेशानी ठीक होगा।
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