बिहारः शराबबंदी से नीतीश कैबिनेट का यूटर्न, मकान जब्ती और गिरफ्तारी जैसे मामलों में मिलेगी राहत

बिहारः शराबबंदी से नीतीश कैबिनेट का यूटर्न, मकान जब्ती और गिरफ्तारी जैसे मामलों में मिलेगी राहत



शराबबंदी कानून में संशोधन को बुधवार को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। संशोधन विधेयक विधानमंडल के मानसून सत्र में पेश होगा। विधानमंडल से पारित कराने के बाद संशोधन कानून लागू होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने इसकी जानकारी दी। वहीं, जानकारी के अनुसार शराबंदी कानून के तहत सामूहिक जुर्माना को खत्म किया जाएगा। साथ ही मकान-वाहन की जब्ती के कानून को भी शिथिल किया जाएगा।

शराबबंदी कानून के तहत होने वाली सजा की अवधि को भी कम किया जा सकता है। चूंकि इससे संबंधित विधेयक विधानमंडल के आगामी सत्र में पेश होना है, लिहाजा आधिकारिक तौर पर कानून में किये गये संशोधन के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। यह भी बताया जा रहा है कि इस कानून के कुछ अन्य प्रावधानों में भी फेरबदल होगा।

कानून के दुरुपयोग के मामलों को रोकने के लिए भी आवश्यक बदलाव किए गए हैं। कोई किसी को शराबबंदी कानून के तहत झूठे आरोपों में नहीं फंसा सके, इसका इंतजाम नये कानून में होगा। गौरतलब हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कई बार अपने भाषण में कह चुके हैं कि संशोधन को लेकर लोगों की राय ली गई है। राय के आधार पर भी कुछ संशोधन होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विधानमंडल के मॉनसून सत्र में शराबबंदी कानून में आवश्यक संशोधन किये जाएंगे। एक-एक प्रावधान पर अध्ययन किया जा रहा है। प्रशासनिक तंत्र द्वारा भी धनार्जन के लिए कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इन्हें बदला जाएगा। लेकिन एक बात साफ है कि शराबबंदी से कोई समझौता नहीं होगा। मुख्यमंत्री मंगलवार को अधिवेशन भवन में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग और अवैध कारोबार को विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय नशा विमुक्ति दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि यह मेरा व्यक्तिगत विषय नहीं है। यह हम सबका दायित्व है।
उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों को कहा कि कानून को लागू करने में सख्ती करिए, लेकिन सिर्फ इससे शराबबंदी में पूर्ण सफलता नहीं मिलेगी। शराब और नशा के दुरुपयोग के बारे में लोगों को बतायें। इसका सेवन नहीं करने के लिए उन्हें जागरूक करें। यहां इतने सारे आईजी, डीआईजी और एसपी बैठे हैं। यह आप सभी का दायित्व है। आपलोग भारी परीक्षा पास करके यहां आये हैं। आपको कितना बताएंगे। आपलोगों को खुद समझ में आता होगा। वर्ष 2006-07 में स्कूलों में शिक्षकों की कमी थी तो कई पुलिस वाले बच्चों को पढ़ाने का भी काम किये थे। बाद में शिक्षकों की नियुक्ति बड़ी संख्या में हुई, इसके बाद इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी लागू करना साधारण बात नहीं है। कोई राज्य हिम्मत नहीं करता है। कई मुख्यमंत्रियों ने मुझसे कहा कि उनके यहां भी शराबबंदी की मांग उठ रही है। विशेष कर महिलाएं उठा रही हैं। लेकिन कोई इसे लागू नहीं कर रहा है। मैंने मुख्यमंत्रियों को कहा है कि आप बिहार में पदाधिकारियों को भेजकर अध्ययन करा लें। जिस गांव में इच्छा हो जाकर देख लें। शराबबंदी के कारण गांवों में किस तरह खुशहाली और शांति आई है। छत्तीसगढ़ से कुछ पदाधिकारी बिहार आने वाले भी हैं। बिहार में शराबबंदी के बाद यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल में लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। शराब अधिक बेच रहे हैं। लेकिन यह घिनौना लाभ है। मैंने झारखंड के मुख्यमंत्री को भी इसकी जानकारी दी थी। घर में खटिया-बाल्टी भी नहीं थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब का सेवन करने वाले गरीब लोगों के घर में खटिया-बाल्टी तक नहीं थी। जो कमाते थे, शराब में बहा देते थे। शराबबंदी के बाद खटिया, बाल्टी आदि घरेलू सामान की बिक्री काफी बढ़ी। दूध, मिठाई, रेडिमेड कपड़े आदि की भी बिक्री बढ़ी। 86 फीसदी कार्यक्षमता बढ़ी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का सर्वेक्षण आया है कि शराबबंदी के बाद 86 फीसदी लोगों का स्वास्थ्य सुधारा। 75 फीसदी लोगों की आमदनी बढ़ी, 83 फीसदी लोगों की बचत में वृद्धि हुई, 81 फीसदी लोगों में डिप्रेशन और 77 फीसदी में तनाव में कमी आई। बेगूसराय में सर्जिकल स्पीरिट से हुई मौत मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्जिकल स्पिरिट पीने से बेगूसराय में चार लोगों की मौत हुई है। इसी तरह पहले गोपालगंज, वैशाली और रोहतास में जहरीली शराब से लोगों की मौत हुई थी। यह सोचने वाली बात है कि समाज में कुछ ऐसे मानसिकता के लोग है, जो शराब के गलत कारोबार में लिप्त हैं। शराब का सेवन करने वाले लोग इनका शिकार होते हैं। कुछ लोग इसकी गलत व्याख्या करेंगे। लेकिन यह नीति और कानून की विफलता नहीं है। ऐसी घटनाओं से लोगों को सबक लेना चाहिए। प्रशासन को भी यह बात सभी को बतानी चाहिए कि नशा करने बचें, नहीं तो इसका अंजाम खतरनाक हो सकता है। घर में खटिया-बाल्टी भी नहीं थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब का सेवन करने वाले गरीब लोगों के घर में खटिया-बाल्टी तक नहीं थी। जो कमाते थे, शराब में बहा देते थे। शराबबंदी के बाद खटिया, बाल्टी आदि घरेलू सामान की बिक्री काफी बढ़ी। दूध, मिठाई, रेडिमेड कपड़े आदि की भी बिक्री बढ़ी। 86 फीसदी कार्यक्षमता बढ़ी मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का सर्वेक्षण आया है कि शराबबंदी के बाद 86 फीसदी लोगों का स्वास्थ्य सुधारा। 75 फीसदी लोगों की आमदनी बढ़ी, 83 फीसदी लोगों की बचत में वृद्धि हुई, 81 फीसदी लोगों में डिप्रेशन और 77 फीसदी में तनाव में कमी आई।
बेगूसराय में सर्जिकल स्पीरिट से हुई मौत मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्जिकल स्पिरिट पीने से बेगूसराय में चार लोगों की मौत हुई है। इसी तरह पहले गोपालगंज, वैशाली और रोहतास में जहरीली शराब से लोगों की मौत हुई थी। यह सोचने वाली बात है कि समाज में कुछ ऐसे मानसिकता के लोग है, जो शराब के गलत कारोबार में लिप्त हैं। शराब का सेवन करने वाले लोग इनका शिकार होते हैं। कुछ लोग इसकी गलत व्याख्या करेंगे। लेकिन यह नीति और कानून की विफलता नहीं है। ऐसी घटनाओं से लोगों को सबक लेना चाहिए। प्रशासन को भी यह बात सभी को बतानी चाहिए कि नशा करने बचें, नहीं तो इसका अंजाम खतरनाक हो सकता है।
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